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भारतीय संगीत में ताल क्या है?

 अपने साधारण अर्थों में ताल समय को मापने का पैमाना है। ताल वह निश्चित मात्राओं का चक्र है, जिसमें स्वर और लय को बाँधकर प्रस्तुत किया जाता है। 👉 सरल शब्दों में, ताल = समय की गणना करने का साधन है, जिससे गीत, वादन और नृत्य अनुशासित रहते हैं।

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन तबला वादक जीवन परिचय

नाम: उस्ताद ज़ाकिर हुसैन (Zakir Hussain ) जन्म: 9 मार्च 1951, मुंबई, भारत निधन: 15 दिसंबर 2024, सैन फ्रांसिस्को, यूएसए  मृत्यु का कारण: इडियोपैथिक पल्मोनरी फिब्रोसिस (idiopathic pulmonary fibrosis)  --- उपलब्धियाँ और प्रमुख बातें भारतीय वाद्य तबला को एक अकेला वाद्य (solo instrument) बनाकर शास्त्रीय संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई।  रचनात्मक संयोग (Collaborations): रवि शंकर, अली अकबर ख़ान, जॉन मैकलॉफलिन, यां-यो मा और जॉर्ज हैरिसन सहित अनेक संगीतकारों के साथ काम किया।  बैंड और परियोजनाएँ: 1973 में “Shakti” नामक फ्यूज़न बैंड के संस्थापक सदस्य थे।  पुरस्कार एवं सम्मान Padma Shri – 1988 Padma Bhushan – 2002 Padma Vibhushan – 2023  Sangeet Natak Akademi Award – 1990 Sangeet Natak Akademi Fellowship (Ratna Sadsya) – 2018  Grammy Awards – कुल 4 मिले, जिसमें से 3 एक ही वर्ष (2024) में मिले। National Heritage Fellowship (USA), Kyoto Prize, आदि जैसे अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार भी प्राप्त किए।  निष्कर्ष   उस्ताद ज़ाकिर हुसैन भारतीय व विश्व संगीत के एक अमिट सि...

भारतीय वाद्यों का वर्गीकरण

  भारतीय वाद्यों का वर्गीकरण भारतीय संगीतशास्त्र में वाद्यों का वर्गीकरण भरतमुनि के नाट्यशास्त्र तथा बाद के ग्रंथों जैसे संगीतरत्नाकर आदि में मिलता है। वाद्य यंत्रों को चार मुख्य वर्गों में बाँटा गया है : 1. तत् वाद्य (Chordophones / String Instruments) वे वाद्य जो तार से बने होते है अर्थात जिनमें तार (सूत / नादसूत्र) को झंकारने से ध्वनि उत्पन्न होती है। इसमें तारों को बजाने, पिंचने, झंकारने या धनुष से चलाने पर नाद निकलता है। उदाहरण : वीणा सितार सरोद संतूर तानपुरा वायलिन विशेषता : इनमें स्वर और लय दोनों को प्रदर्शित करने की क्षमता होती है। --- 2. अवनद्ध वाद्य (Membranophones / Percussion Instruments) वे वाद्य जो भीतर से पोपले अर्थात खोखले होते है तथा  उनके मुख पर  चमड़े (पशु-चर्म) की झिल्ली कसकर बाँधी जाती है और उसी पर आघात करने से ध्वनि निकलती है। मुख्यतः ताल और लय देने वाले वाद्य। उदाहरण : तबला मृदंगम ढोलक पखावज नगाऱा डफली विशेषता : यह वाद्य संगत और ताल-नियंत्रण के लिए सर्वाधिक उपयोगी होते हैं। --- 3. घन वाद्य (Idiophones / Solid Instruments) वे वाद्य जो धातु के बने हो...

Tabla vadya parichaya

  तबला : भारतीय संगीत का प्रमुख अवनद्ध वाद्य भारतीय संगीत परंपरा में तबला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय तालवाद्य है। यह वाद्य यंत्र न केवल शास्त्रीय संगीत का अभिन्न अंग है, बल्कि लोकसंगीत, भक्ति संगीत, नृत्य तथा आधुनिक संगीत में भी समान रूप से प्रयोग किया जाता है। तबला की मधुरता, नाद की विविधता और तालबद्ध ध्वनियाँ श्रोता के मन को गहराई से प्रभावित करती हैं। इतिहास और उत्पत्ति तबला की उत्पत्ति के विषय में कई मत प्रचलित हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह वाद्य 13वीं शताब्दी में अमीर खुसरो द्वारा बनाया गया था, जबकि अन्य इसे पखावज से विकसित मानते हैं। चाहे जो भी हो, समय के साथ तबला भारतीय संगीत की आत्मा बन गया।परन्तु विभिन्न शोध ग्रंथों व प्राचीन तथ्यों के आधार पर कह सकते है कि तबला भारतीय संगीत में प्राचीन काल से ही प्रचलित था विभिन्न रूपों में ,अपने वर्तमान रूप आने में अनेकों परिवर्तनों से होकर गुजरा,18वी शताब्दी से हमे वर्तमान तबला वाद्य का प्रचलित रूप मिलता है। संरचना तबला दो भागों में विभाजित होता है – दायाँ और बायाँ। दायाँ (जिसे “तबला” कहते हैं) छोटा और लकड़ी से बना होता है,...
 रुद्र वीणा   भारतीय संगीत  में रुद्र वीणा एक प्राचीन वाद्ययंत्र माना जाता है। यह न केवल शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख वाद्य है, बल्कि इसका संबंध आध्यात्मिकता से भी जोड़ा जाता है। 1. प्राचीन ग्रंथों में वीणा का उल्लेख (क) वेद और पुराणों में वेदों में ‘वीणा’ शब्द का प्रयोग तो मिलता है, पर वह सामान्य रूप से किसी तंतुवाद्य के लिए किया गया है, न कि रुद्र वीणा के लिए। शिव पुराण, स्कंद पुराण, और अन्य शैव ग्रंथों में भगवान शिव को ‘वीणाधर’ कहा गया है। इन ग्रंथों के अनुसार, शिव ने ध्यान और तांडव करते हुए वीणा और डमरू का वादन किया, किंतु वहाँ भी "रुद्र वीणा" शब्द का प्रयोग नहीं हुआ है। (ख) नाट्यशास्त्र (भरतमुनि) भरत मुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र (लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व) में भी ‘वीणा’ का विस्तृत वर्णन है। इसमें वीणा की विभिन्न रचनाओं, प्रकारों और उसके प्रयोग की तकनीक पर चर्चा की गई है। परंतु इस ग्रंथ में भी “रुद्र वीणा” नाम से किसी विशेष वीणा का उल्लेख नहीं मिलता। 2. मध्यकालीन ग्रंथों में रुद्र वीणा का आगमन (क) संगीत रत्नाकर (शारंगदेव) 13वीं शताब्दी में लिखे गए शारंगदेव के ग्रं...
प्रमुख तबला वादक पंडित सामता प्रसाद उर्फ गुदई महाराज जीवन परिचय  पंडित सामता प्रसाद , जिन्हें स्नेहपूर्वक " गुदई महाराज " कहा जाता है, भारतीय शास्त्रीय संगीत के बनारस घराने के एक महान तबला वादक थे।  आपका जन्म 20 जुलाई 1921 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी के कबीर चौरा नामक स्थान पर  हुआ था।  उनका परिवार तबला और पखावज की परंपरा में गहराई से रचा-बसा था।  उनके पिता पंडित हरि सुंदर (बच्चा मिश्रा के नाम से भी प्रसिद्ध), दादा पंडित जगन्नाथ मिश्रा और पूर्वज पंडित प्रताप महाराज (गुदई महाराज) सभी प्रतिष्ठित संगीतज्ञ थे।   प्रारंभिक जीवन और शिक्षा सामता प्रसाद ने अपने पिता बच्चा मिश्र जी से तबला वादन की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, लेकिन जब वे केवल सात वर्ष के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया।  इसके बाद, उन्होंने पंडित बिक्कू महाराज (जो स्वयं पंडित बलदेव सहाय के शिष्य थे) से प्रशिक्षण लिया।  उन्होंने प्रतिदिन लंबे समय तक अभ्यास करके अपनी कला में निपुणता प्राप्त की।    उपलब्धियाँ 1942 में इलाहाबाद संगीत सम्मेलन में अपने पहले  के साथ, सामता ...

भारतीय संगीत में लय क्या है।

व्यापक अर्थ में लय नैसर्गिक है,यह सम्पूर्ण जगत में विद्यमान है। प्रकृति लय मय है प्रातः काल सूर्योदय होना फिर दोपहर फिर शाम और रात्रि ये सभी एक लय में बद्ध होती है। मनुष्य के हृदय की गति एक निश्चित लय में ही होती है ,और जब इस निश्चित लय में अनिश्चितता होती है तो वो प्रलय को दर्शाती है, मोटे तौर में संगीत में   हम कह सकते है कि समय की समान गति को लय कहते है। लय तीन प्रकार की होती है  1.विलंबित लय 2. मध्य लय 3. द्रुत लय 1 . विलंबित लय विलंबित अर्थात् धीमा,जब गायन वादन आदि कार्य धीमी गति से हो तो उसे विलंबित लय कहते हैं। 2. मध्य लय  संगीत में जब गायन वादन आदि कार्य न तो बहुत अधिक तेज और न ही बहुत अधिक धीमी गति में हो अर्थात मध्य यानि बीच की लय में हो तो उसे मध्य लय कहते हैं। 3. द्रुत लय द्रुत यानि तेज  अर्थात संगीत में जब गायन वादन आदि कार्य तेज में में हो तो उसे द्रुत लय कहते हैं। संगीत में अधिकतर कार्य मध्य लय में ही होता है । विलंबित लय का उदाहरण गायन में बड़ा ख्याल द्रुत लय का उदाहरण सितार का झाला तबला में रेला आदि है।